भोपाल सिटी बस सेवा में खत्म होगा राजनीतिक दखल, अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन संचालन

भोपाल

भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा।

भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड‎(बीसीएलएल) ‎राज्य सरकार की नई 'मुख्यमंत्री सुगम‎परिवहन सेवा' का हिस्सा बन गई है। ‎इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम ‎को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौर‎और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल)‎ सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता ‎था, लेकिन अब कमान पूरी तरह ‎प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी ‎तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान ‎व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू‎ अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी।‎

ये भी पढ़ें :  लोक निर्माण विभाग, लोक अर्थात जनता और निर्माण अर्थात सृजन से जन-जन की सेवा के संकल्प को कर रहा है साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा
नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन ‎में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ ‎नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।‎दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में‎ होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।‎ सिफारिशें नहीं चलेंगी

जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज या‎नई बसें चलाने में अब पार्षदों या ‎एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा‎ नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे ‎सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और‎ व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे।‎

ये भी पढ़ें :  लेबर लॉ के खिलाफ हड़ताल का असर मिला-जुला, जबलपुर-इटारसी में बाजार और स्कूल खुले; सरकारी कर्मचारी सांकेतिक प्रदर्शन

भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी ‎कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन‎ से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया‎ निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी ‎यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगम‎पर निर्भरता खत्म होगी।‎

बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने‎ वाली शिकायतों (जैसे चालकों की‎मनमानी, समय पर बस न मिलना) को‎दूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट‎ मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। ‎इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू‎ मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी।‎ कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी।‎

भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें‎ योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 ‎मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार ‎किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य‎ मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम ‎संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी।‎ सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी‎ ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन‎ पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल‎पर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर‎ निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।‎

ये भी पढ़ें :  मध्य प्रदेश के 10 जिलों में भीषण गर्मी का अलर्ट, 21-23 अप्रैल तक लू का यलो अलर्ट, खजुराहो में तापमान 43 डिग्री के करीब

बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment